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किसान कर सकेंगे नई तकनीक से खेती,योगी सरकार का फैसला

लखनऊ। कई इलाकों में सूखा पड़ने से किसान परेशान हैं इसलिए योगी सरकार इस समस्या से निपटने के लिए कई प्रयत्न कर रही है। किसानो को सूखे की समस्या से निजात दिलाने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है। इस फैसले के तहत योगी सरकार जहां सूखे की समस्या है वहां कृत्रिम बारिश कराकर किसानों को राहत पहुंचाएगी। आपको बता दें कि इस कृत्रिम बारिश को कराने के लिए हेलीकाप्टर का प्रयोग किया जायेगा। सरकार की इस योजना को पूरा करने के लिए आइआइटी कानपुर सीएम योगी आदित्यनाथ की सहायता करेगी। इस योजना को पूरा कर्ण के लिए प्रोजक्ट भी तैयार कर लिया गया है।artificial rain

किसानों को सूखे की समस्या से राहत

सूत्रों के मुताबिक ज्ञात हुआ है कि इस प्रोजेक्ट के लिए सिंचाई विभाग काम कर रहा है। हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह जरिये से कहा गया है कि सूखे की समस्या से किसानों को राहत देने और साथ ही कृषि की पैदावार बढाने के लिए योगी सरकार ने ये फैसला किया है। इस योजना के लिए 5.5 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा।आपको बता दें कि हेलीकोप्टर का प्रयोग करके कृतिम बारिश कराई जाएगी ये बारिश एक हजार किलोमीटर में कराई जाएगी ।

बुंदेलखंड से कृत्रिम बारिश प्रोजेक्ट की शुरुआत

वहीं मंत्री धर्मपाल ने कहा है कि मानसून खत्म होने के बाद पर्याप्त बारिश न होने की स्थिति में बुंदेलखंड से कृत्रिम बारिश प्रोजेक्ट की शुरुआत की जाएगी । साथ में ये भी बताया कि इस सुविधा का लाभ राज्य के सभी सूखा प्रभावित जिलों में किसान आसानी से ले सकेंगे। इस प्रोजेक्ट में पहले तो प्राकृतिक गैसों के द्वारा कृत्रिम बादल बनाये जायेंगे। उसके बाद जिन इलाकों में सूखे की समस्या है या फिर जिन इलाकों बारिश कराने की जरुरत पड़ेगी वहां आसमान में हेलीकॉप्टर से सिल्वर आयोडाइड और कुछ दूसरी गैसों का घोल उच्च दाब छिड़का जाएगा।

ये देश भी करते हैं इस तकनीक से खेती

आपको बता दें कि केमिकल के छिडकाव करने से उन जगहों पर बारिश होगी। इस तकीनीकी को जानने के लिए सिंचाई विभाग आइआइटी कानपुर के विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर चुका है। ऐसी बारिश को बनावटी बारिश भी कह सकते हैं खास बात यह है कि इस बारिश के लिए आइआइटी कानपुर ने तमाम उपकरणों का इंतजाम भी कर लिया है। शायद आपको ना पता हो कि दुनिया में कई देश ऐसी बारिश का इस्तेमाल करते हैं। इसमें चीन, इजराइल, इंडोनेशिया, रूस, मैक्सिको जैसे देश शामिल हैं।आपको बता दें कि कृषि मंत्री के मुताबिक पहले चीन ने इस बारिश के लिए आर्थिक मदद देने की बात कही थी लेकिन बाद में चीन ने इस बात के लिए इंकार कर दिया। उसके बाद आइआइटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने अपने प्रयास इस योजना को सफल बनाने का काम कर रहे है ।.

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