पूंजीगत व्यय वृद्धि में बड़े राज्य पिछड़े, हरियाणा सबसे आगे

नई दिल्ली (जेएनएन)। राज्य सरकारें लोकलुभावन घोषणाओं पर भले ही जोर दें, लेकिन वे विकास दर को उठाने के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाने में कंजूसी बरतती हैं। वित्त वर्ष 2015-16 में कम से कम सात राज्यों के पूंजीगत खर्च में भारी भरकम गिरावट दर्ज हुई है। जबकि इसमें खास तौर पर गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में अपेक्षानुरूप वृद्धि नहीं हुई है। देश में सिर्फ हरियाणा ही एकमात्र राज्य है, जहां इस व्यय में 85.9 फीसद का भारी भरकम इजाफा हुआ है।

केंद्र व राज्य सरकारों के संयुक्त वित्तीय और राजस्व खातों पर कैग की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 में असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, सिक्किम तथा उत्तराखंड में पूंजीगत व्यय में गिरावट आई। जबकि छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इस दौरान पूंजीगत खर्च में वृद्धि की दर धीमी रही। हालांकि अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, नगालैंड और राजस्थान में वित्त वर्ष 2015-16 में पूंजीगत व्यय में वृद्धि दोगुनी हुई है, जबकि सबसे ज्यादा 85.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हरियाणा में हुई है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 में लगातार दो साल तक हरियाणा में पूंजीगत खर्च घटा था। लेकिन राज्य में नई सरकार के गठन के बाद इसमें तेज बढ़ोतरी हुई। राज्य ने यह धनराशि आर्थिक क्षेत्र के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र पर भी खर्च की है। रिपोर्ट से पता चलता है कि अधिकतर राज्यों में पूंजीगत व्यय का अधिकांश भाग आर्थिक क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है। हालांकि हाल के वर्षो में कुछ राज्यों में सामाजिक क्षेत्र में भी पूंजीगत खर्च बढ़ा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *