पब्लिक वेलफेयर हॉस्पीटल लाइसेंस निलंबित के बाद भी चल रहा

इस हॉस्पिटल से पीड़ित परिजनों का कहना है कि इस हॉस्पिटल में इलाज व डिलीवरी के नाम पर मौत मिलती है चाहे वह महिला की हो या नवजात की।
इस हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली से आक्रोशित है पीड़ित परिवारों का कहना है कि पब्लिक वेलफेयर हॉस्पिटल में अनट्रेंड स्टाफ से डिलीवरी कराई जाती है जिसका नतीजा मौत के रूप में सामने आता है पीड़ित परिजनों की शिकायत करने के बाद मजिस्ट्रेट जांच में भी सामने आ चुका है।
जांच में हॉस्पिटल की लापरवाही सामने आई थी। मजिस्ट्रेट ने पब्लिक वेलफेयर हॉस्पिटल का लाइसेंस निलंबित कर अग्रिम आदेश तक हॉस्पिटल संचालन पर रोक लगाई थी।सीएमओ डॉक्टर मुकेश वत्स ने बताया कि एनआईसीयू में रोक लगाने के बाद लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया है। उनके मुताबिक अगर पब्लिक वेलफेयर हॉस्पिटल चलता पाया जाता है तो संचालक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे।यह आदेश देने के बाद लगता है कि सीएमओ ओर प्रशासन गहरी नींद में सो गए है, क्योंकि लाइसेंस निलबंन के बाद भी हॉस्पिटल का संचालन बदस्तूर जारी है।हॉस्पिटल में पहले की तरह मरीजों को देखा और भर्ती किया जा रहा है, लेकिन सीएमओ ओर प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है लगता है कि सीएमओ औरप्रशासन को इस हॉस्पिटल में ओर मौत होने का इंतजार है।यहां आपको बता दें कि बरौली अहीर निवासी दंत रोग चिकित्सक डॉ रोहताश यादव ने अपनी पत्नी डॉक्टर अनुपमा को एक अक्टूबर को परिचित के कहने पर डॉक्टर कहकशा खान से चेकअप करवाया।
आरोप है चेकअप के दौरान प्रसव पीड़ा न होने पर भी वह अनुपमा को प्रसव रुम में ले गयी। वह डॉक्टर ने प्रसव के लिए ऑक्सीटॉसिन की ज्यादा डोज लगा दी। रोहताश यादव ने बताया कि प्रसव को डॉक्टर की जगह अनट्रेंड नर्स ने कियाऑक्सीटोसिन की ज्यादा डोज होने के कारण बच्चे में ऑक्सीजन की कमी हो गई। यह देख डॉक्टर ने नवजात को दूसरे हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया वहां 24 घंटे बाद नवजात की मौत हो गई। वहीं दूसरा मामला बरौली अहीर निवासी कमलेश का है उन्होंने इस हॉस्पिटल पर भी गंभीर आरोप लगाए उन्होंने बताया कि उनकी पुत्रवधू कविता पत्नी पप्पन को पब्लिक वेलफेयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया था या उसकी 1 अक्टूबर को डिलीवरी हुई। डिलीवरी के बाद नवजात ठीक-ठाक था पुत्रवधू नवजात को स्तनपान करा रही थी इसी हॉस्पिटल का कंपाउंडर आया और शिशु की नाक में नली डालने लगा नाक में नली जाते ही शिशु के नाक से खून बहने लगा । ये देख डॉक्टर और स्टाफ घबरा गए। उन्होंने शिशु को दूसरे हॉस्पिटल में रेफर कर दिया जहा 24 घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
पब्लिक वेलफेयर हॉस्पिटल में एक के बाद एक लगभग 10 महीनो के अंदर कई मौतें हो गई। रोहताश के मुताबिक पिछले 1 साल से वह इंसाफ के लिए ओर हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई को संघर्ष कर रहे हैं उनके संघर्ष और मजिस्ट्रेट जांच में हॉस्पिटल लाइसेंस निलंबित किया गया लेकिन हॉस्पिटल बंद ना होने से वह और पीड़ित परिवार आहत हैं। उनका पुलिस पर भी आरोप है कि आज तक उनका मुकदमा तक नहीं लिखा गया अब देखना यह सीएमओ ओर प्रशासन और शासन इस हॉस्पिटल के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं और आगरा प्रशासन की कब नींद टूटती है।उधर इंदिरापुरम निवासी राम गोपाल सक्सेना और नौफ़री निवासी पीड़ित ने बताया कि उनका मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस प्रशासन ने आज तक डॉक्टर खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

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