अहोई अष्‍टमी व्रत का महत्‍व और पूजन विधि

अहोई पूजा महत्‍व
ह‍िंदू धर्म में करवा चौथ के बाद अष्‍टमी के द‍िन अहोई माता का पूजन क‍िया जाता है। अहोई अष्‍टमी को अहोई आठें के नाम से भी जानते हैं। इस बार यह पूजन12 अक्‍टूबर द‍िन बृह‍स्‍पत‍िवार को क‍िया जाएगा। इस द‍िन मह‍िलाएं पुत्रों की भलाई व उनकी लंबी आयु की कामना और घर में सुख-समृद्ध‍ि के ल‍िए व्रत भी रखती हैं। पूरा द‍िन व्रत रखने शाम के समय व‍िध‍िव‍िधान से पूजा की जाती है। इसके बाद चांद या फ‍िर तारों के दर्शन करके प्रसाद ग्रहण कर व्रत पूरा करती हैं।

पूजा करने की व‍िधि‍

अष्‍टमी के द‍िन व‍िभि‍न्‍न प्रकार के व्‍यंजन बनाए जाते हैं। पूरा द‍िन मह‍िलाएं नि‍र्जल व्रत रखती हैं। इसके बाद शाम के समय दीवार पर आठ कोनों वाली अहोई माता, स्याहू माता और उनके बच्चों के भी चित्र बनाए जाते हैं। इन च‍ित्रों में लाल गेरू और पीले रंग की हल्दी से सुन्दर रंग भरे जाते हैं। तेल का दीपक जलाकर इनकी व‍िध‍िव‍त पूजा व आरती की जाती है। इस दौरान अहोई माता के सामने व‍िव‍िध प्रकार के व्‍यंजनों का भोग लगाया जाता है।

चांदी का लॉकेट पहनें

पूजा के समय अहोई माता की कथा भी कही जाती है। अहोई माता की पूजा में दीवार पर बने च‍ित्रों पर अहोई माता के चि‍त्र वाला चांदी का लॉकेट पहनाया जाता है। इसके बाद इस लॉकेट को व्रत करने वाली मह‍िलाओं को धारण करना होता है। इसमें  मह‍िलाओं को अपनी संतानों की संख्‍या के मुताबि‍क चांदी के मोती प‍िरोने होते हैं। पूजा के बाद अहोई माता से अनजाने में हुई गलत‍ियों के ल‍िए क्षमा मांगे। इतना ही नहीं घर के बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

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